ग़ज़ल

खुदी कानून  है उलझा  इसे रंगीन  मत करिये
समुंदर है बहुत खारा इसे नमकीन मत करिये

बतायें कौन है शातिर नहीं कह दें सियासत में
कबूतर हैं सभी उजले इन्हें शाहीन मत करिये

Comments